भारत की जलवायु
भारत भौगोलिक विविधता वाला देश है, जहाँ हिमालय की हिमाच्छादित पर्वत श्रृंखलाओं से लेकर तटीय मैदानों, मरुस्थलों और द्वीपों तक विभिन्न प्रकार की जलवायु पाई जाती है। भारत की जलवायु को सामान्यतः उष्णकटिबंधीय मानसूनी जलवायु (Tropical Monsoon Climate) कहा जाता है, क्योंकि यहाँ वर्षा का प्रमुख स्रोत मानसूनी पवनें हैं।
प्रतियोगी परीक्षाओं जैसे UPSC, State PCS, SSC, Railway, Banking, CDS, NDA, CAPF तथा अन्य सरकारी परीक्षाओं में भारत की जलवायु, मानसून, वर्षा, जलवायु को प्रभावित करने वाले कारक तथा कोपेन जलवायु वर्गीकरण से संबंधित प्रश्न नियमित रूप से पूछे जाते हैं। इस लेख में इन सभी विषयों का विस्तृत अध्ययन प्रस्तुत किया गया है।
भारत की जलवायु की प्रमुख विशेषताएँ
भारत की जलवायु की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं—
- उष्णकटिबंधीय मानसूनी जलवायु
- वर्षा का प्रमुख स्रोत दक्षिण-पश्चिम मानसून
- ऋतुओं का स्पष्ट परिवर्तन
- क्षेत्रीय जलवायु में अत्यधिक विविधता
- तापमान एवं वर्षा में असमान वितरण
- समुद्र एवं हिमालय का गहरा प्रभाव
भारत की जलवायु को प्रभावित करने वाले प्रमुख कारक
1. अक्षांश (Latitude)
कर्क रेखा भारत के लगभग मध्य भाग से गुजरती है। इसके कारण दक्षिण भारत में उष्णकटिबंधीय तथा उत्तर भारत में उपोष्णकटिबंधीय जलवायु का प्रभाव दिखाई देता है।
2. हिमालय पर्वतमाला
हिमालय मध्य एशिया से आने वाली अत्यधिक ठंडी हवाओं को रोकता है तथा दक्षिण-पश्चिम मानसून को उत्तर की ओर आगे बढ़ने से रोककर भारत में वर्षा कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
3. समुद्र से दूरी
समुद्र के निकट स्थित क्षेत्रों जैसे मुंबई, चेन्नई और कोच्चि में समुद्री प्रभाव के कारण तापमान अपेक्षाकृत संतुलित रहता है, जबकि दिल्ली, नागपुर और जयपुर जैसे आंतरिक क्षेत्रों में तापमान में अधिक उतार-चढ़ाव देखा जाता है।
4. ऊँचाई (Altitude)
ऊँचाई बढ़ने पर तापमान घटता है। यही कारण है कि शिमला, दार्जिलिंग, श्रीनगर और ऊटी जैसे पर्वतीय क्षेत्रों का मौसम वर्षभर अपेक्षाकृत ठंडा रहता है।
5. मानसूनी पवनें
दक्षिण-पश्चिम मानसून भारत की कुल वार्षिक वर्षा का लगभग 70–75% भाग प्रदान करता है। कृषि, पेयजल एवं जलविद्युत उत्पादन के लिए मानसून अत्यंत महत्वपूर्ण है।
भारत में मानसून
दक्षिण-पश्चिम मानसून
- सामान्यतः जून के प्रथम सप्ताह में केरल तट पर प्रवेश करता है।
- दो शाखाओं में विभाजित होता है—
- अरब सागर शाखा
- बंगाल की खाड़ी शाखा
- जून से सितंबर के बीच देश के अधिकांश भाग में वर्षा होती है।
उत्तर-पूर्व मानसून
- अक्टूबर से दिसंबर के बीच सक्रिय रहता है।
- तमिलनाडु, दक्षिण आंध्र प्रदेश तथा पुडुचेरी में मुख्य वर्षा इसी मानसून से होती है।
भारत में वर्षा का वितरण
भारत में वर्षा समान रूप से नहीं होती। विभिन्न क्षेत्रों में वर्षा की मात्रा अलग-अलग है।
सर्वाधिक वर्षा वाले क्षेत्र
- मौसिनराम (मेघालय)
- चेरापूंजी (मेघालय)
- पश्चिमी घाट
- अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह
न्यूनतम वर्षा वाले क्षेत्र
- पश्चिमी राजस्थान (थार मरुस्थल)
- लद्दाख का शीत मरुस्थलीय क्षेत्र
भारत की जलवायु का कोपेन (Köppen) वर्गीकरण
भारत में निम्न प्रमुख जलवायु प्रकार पाए जाते हैं—
- उष्णकटिबंधीय आर्द्र जलवायु
- उष्णकटिबंधीय आर्द्र एवं शुष्क जलवायु
- अर्ध-शुष्क जलवायु
- मरुस्थलीय जलवायु
- आर्द्र उपोष्णकटिबंधीय जलवायु
- पर्वतीय (अल्पाइन) जलवायु
भारत की कृषि पर जलवायु का प्रभाव
- खरीफ एवं रबी फसलों का निर्धारण
- सिंचाई की आवश्यकता
- जल संसाधनों की उपलब्धता
- खाद्यान्न उत्पादन
- बागवानी एवं नकदी फसलों का वितरण
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प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
- भारत की जलवायु – उष्णकटिबंधीय मानसूनी
- मानसून का प्रथम आगमन – केरल
- सर्वाधिक वर्षा – मौसिनराम (मेघालय)
- न्यूनतम वर्षा – पश्चिमी राजस्थान
- मुख्य वर्षा ऋतु – जून से सितंबर
- तमिलनाडु में मुख्य वर्षा – उत्तर-पूर्व मानसून
- पश्चिमी विक्षोभ – उत्तर-पश्चिम भारत में शीतकालीन वर्षा का कारण
- अरब सागर शाखा पश्चिमी घाट में अधिक वर्षा कराती है।
निष्कर्ष
भारत की जलवायु देश की कृषि, अर्थव्यवस्था, जल संसाधनों और जनजीवन का आधार है। मानसूनी पवनें भारतीय जलवायु की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता हैं। प्रतियोगी परीक्षाओं में जलवायु, मानसून, वर्षा वितरण, कोपेन वर्गीकरण, पश्चिमी विक्षोभ तथा स्थानीय हवाओं से संबंधित प्रश्न नियमित रूप से पूछे जाते हैं। इसलिए इन विषयों का गहन अध्ययन और नियमित पुनरावृत्ति सफलता के लिए अत्यंत आवश्यक है।
Frequently Asked Questions (FAQs)
भारत की जलवायु कैसी है?
भारत की जलवायु मुख्यतः उष्णकटिबंधीय मानसूनी (Tropical Monsoon Climate) है। देश में वर्षा का प्रमुख स्रोत दक्षिण-पश्चिम मानसून है, जबकि विभिन्न भौगोलिक क्षेत्रों में जलवायु में विविधता देखने को मिलती है।
भारत की जलवायु को प्रभावित करने वाले प्रमुख कारक कौन-कौन से हैं?
भारत की जलवायु को अक्षांश, हिमालय पर्वतमाला, समुद्र से दूरी, ऊँचाई, मानसूनी पवनें, पश्चिमी विक्षोभ तथा स्थलाकृति जैसे प्रमुख कारक प्रभावित करते हैं।
भारत में दक्षिण-पश्चिम मानसून सबसे पहले कहाँ पहुँचता है?
दक्षिण-पश्चिम मानसून सामान्यतः जून के प्रथम सप्ताह में केरल तट पर पहुँचता है। इसके बाद यह अरब सागर शाखा और बंगाल की खाड़ी शाखा के रूप में पूरे देश में फैलता है।
भारत में सबसे अधिक वर्षा कहाँ होती है?
भारत में सबसे अधिक औसत वार्षिक वर्षा मौसिनराम (मेघालय) में होती है। यह स्थान विश्व के सर्वाधिक वर्षा वाले क्षेत्रों में भी शामिल है।
भारत में सबसे कम वर्षा किस क्षेत्र में होती है?
भारत में सबसे कम वर्षा पश्चिमी राजस्थान के थार मरुस्थल तथा लद्दाख के शीत मरुस्थलीय क्षेत्र में होती है।
भारत में कुल कितनी प्रमुख ऋतुएँ मानी जाती हैं?
भारतीय मौसम विभाग (IMD) के अनुसार भारत में चार प्रमुख ऋतुएँ मानी जाती हैं— शीत ऋतु, ग्रीष्म ऋतु, दक्षिण-पश्चिम मानसून (वर्षा ऋतु) और उत्तर-पूर्व मानसून (लौटता मानसून)।
तमिलनाडु में मुख्य वर्षा किस मानसून से होती है?
तमिलनाडु में अधिकांश वर्षा उत्तर-पूर्व मानसून (North-East Monsoon) से होती है, जो अक्टूबर से दिसंबर के बीच सक्रिय रहता है।
प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए भारत की जलवायु क्यों महत्वपूर्ण है?
भारत की जलवायु से संबंधित प्रश्न UPSC, State PCS, SSC, Railway, Banking, CDS, NDA तथा अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में नियमित रूप से पूछे जाते हैं। विशेष रूप से मानसून, वर्षा वितरण, जलवायु को प्रभावित करने वाले कारक, कोपेन जलवायु वर्गीकरण और स्थानीय पवनों से जुड़े प्रश्न परीक्षा की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।
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