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British East India Company (ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी) | आधुनिक भारत

यदि आप UPSC, SSC, RPSC, State PCS, Railway, Banking, NDA, CDS या अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं, तो ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी (British East India Company) आधुनिक भारत (Modern India) का सबसे महत्वपूर्ण विषयों में से एक है। इस अध्याय में ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी की स्थापना, भारत में आगमन, व्यापारिक विस्तार,…

यदि आप UPSC, SSC, RPSC, State PCS, Railway, Banking, NDA, CDS या अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं, तो ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी (British East India Company) आधुनिक भारत (Modern India) का सबसे महत्वपूर्ण विषयों में से एक है। इस अध्याय में ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी की स्थापना, भारत में आगमन, व्यापारिक विस्तार, राजनीतिक प्रभुत्व तथा प्रशासनिक विकास का विस्तृत अध्ययन करेंगे।

ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी का परिचय

ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी (British East India Company) एक अंग्रेजी व्यापारिक कंपनी थी, जिसकी स्थापना भारत तथा पूर्वी देशों के साथ व्यापार करने के उद्देश्य से की गई थी। समय के साथ यह कंपनी एक व्यापारिक संस्था से राजनीतिक शक्ति में परिवर्तित हो गई और लगभग दो शताब्दियों तक भारत के बड़े भाग पर शासन किया।

ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी की स्थापना

मुख्य तथ्य

  • स्थापना – 31 दिसंबर 1600
  • स्थापना करने वाली – महारानी एलिज़ाबेथ प्रथम (Queen Elizabeth I)
  • आधिकारिक नाम – Governor and Company of Merchants of London Trading into the East Indies
  • प्रारंभिक उद्देश्य – पूर्वी देशों के साथ व्यापार करना
  • मुख्यालय – लंदन (इंग्लैंड)

भारत में ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी का आगमन

सूरत में पहला आगमन

  • 1608 में कैप्टन विलियम हॉकिन्स भारत आया।
  • वह मुगल सम्राट जहाँगीर के दरबार पहुँचा।
  • अंग्रेजों को प्रारंभ में व्यापार की अनुमति नहीं मिली।

सर थॉमस रो का आगमन

  • 1615 में सर थॉमस रो जहाँगीर के दरबार में आए।
  • उन्होंने अंग्रेजों को भारत में व्यापार करने की अनुमति दिलाई।
  • इसके बाद कंपनी ने कई व्यापारिक केंद्र (Factories) स्थापित किए।

ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी के प्रमुख व्यापारिक केंद्र

1. सूरत

  • भारत का पहला अंग्रेजी व्यापारिक केंद्र
  • स्थापना – 1613

2. मद्रास (चेन्नई)

  • 1639 में फ्रांसिस डे ने भूमि प्राप्त की।
  • फोर्ट सेंट जॉर्ज (Fort St. George) की स्थापना हुई।

3. बंबई (मुंबई)

  • पुर्तगालियों ने बंबई इंग्लैंड के राजा चार्ल्स द्वितीय को दहेज में दिया।
  • बाद में इसे ईस्ट इंडिया कंपनी को पट्टे पर दे दिया गया।

4. कलकत्ता (कोलकाता)

  • जॉब चार्नॉक ने 1690 में व्यापारिक केंद्र स्थापित किया।
  • फोर्ट विलियम का निर्माण किया गया।

ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी का राजनीतिक विस्तार

प्लासी का युद्ध (1757)

  • अंग्रेजों के सेनापति – रॉबर्ट क्लाइव
  • बंगाल के नवाब – सिराजुद्दौला
  • मीर जाफर के विश्वासघात के कारण अंग्रेजों की विजय हुई।
  • यह भारत में ब्रिटिश राजनीतिक सत्ता की शुरुआत माना जाता है।

बक्सर का युद्ध (1764)

युद्ध किनके बीच हुआ?

  • अंग्रेज
  • मीर कासिम
  • मुगल सम्राट शाह आलम द्वितीय
  • अवध के नवाब शुजाउद्दौला

परिणाम

  • अंग्रेजों की निर्णायक विजय।
  • 1765 की इलाहाबाद संधि के बाद बंगाल, बिहार और उड़ीसा की दीवानी कंपनी को प्राप्त हुई।

दीवानी अधिकार (1765)

दीवानी अधिकार का अर्थ है—

  • भूमि कर (Revenue) वसूलने का अधिकार।
  • बंगाल, बिहार एवं उड़ीसा से राजस्व प्राप्त करना।

यह अधिकार मुगल सम्राट शाह आलम द्वितीय द्वारा प्रदान किया गया था।

ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी की प्रमुख नीतियाँ

सहायक संधि (Subsidiary Alliance)

  • प्रवर्तक – लॉर्ड वेलेजली
  • भारतीय राज्यों को अंग्रेजी सेना रखने के लिए बाध्य किया गया।
  • बदले में राज्यों को भारी धनराशि देनी पड़ती थी।

व्यपगत सिद्धांत (Doctrine of Lapse)

  • प्रवर्तक – लॉर्ड डलहौजी
  • दत्तक उत्तराधिकारी को मान्यता नहीं।
  • उत्तराधिकारी न होने पर राज्य अंग्रेजों में मिला दिया जाता था।

ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी का प्रशासन

कंपनी के शासनकाल में अनेक महत्वपूर्ण अधिनियम पारित किए गए—

  • रेगुलेटिंग एक्ट, 1773
  • पिट्स इंडिया एक्ट, 1784
  • चार्टर एक्ट 1813
  • चार्टर एक्ट 1833
  • चार्टर एक्ट 1853

इन अधिनियमों ने भारत में कंपनी प्रशासन को नियंत्रित एवं संगठित किया।

ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी का अंत

  • 1857 का प्रथम स्वतंत्रता संग्राम कंपनी शासन के विरुद्ध सबसे बड़ा विद्रोह था।
  • इसके बाद भारत शासन अधिनियम, 1858 (Government of India Act, 1858) लागू किया गया।
  • कंपनी का शासन समाप्त हो गया।
  • भारत का प्रशासन सीधे ब्रिटिश क्राउन के अधीन चला गया।

ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी की प्रमुख घटनाओं की टाइमलाइन (Timeline)

वर्षप्रमुख घटना
1600ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी की स्थापना
1608कैप्टन विलियम हॉकिन्स भारत पहुँचे
1613सूरत में पहला अंग्रेजी व्यापारिक केंद्र स्थापित
1615सर थॉमस रो जहाँगीर के दरबार पहुँचे
1639मद्रास में फोर्ट सेंट जॉर्ज की स्थापना
1690जॉब चार्नॉक ने कलकत्ता की स्थापना की
1698–1700फोर्ट विलियम का निर्माण
1757प्लासी का युद्ध
1764बक्सर का युद्ध
1765इलाहाबाद की संधि एवं दीवानी अधिकार प्राप्त
1773रेगुलेटिंग एक्ट लागू
1784पिट्स इंडिया एक्ट
1813चार्टर एक्ट 1813
1833चार्टर एक्ट 1833
1853चार्टर एक्ट 1853
1857प्रथम स्वतंत्रता संग्राम
1858कंपनी शासन का अंत, भारत सीधे ब्रिटिश क्राउन के अधीन

ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी के प्रमुख गवर्नर एवं गवर्नर-जनरल

गवर्नर/गवर्नर-जनरलप्रमुख कार्य
रॉबर्ट क्लाइवप्लासी युद्ध के बाद अंग्रेजी सत्ता की नींव रखी, द्वैध शासन (Dual Government) लागू
वॉरेन हेस्टिंग्सप्रथम गवर्नर-जनरल, न्यायिक एवं प्रशासनिक सुधार
लॉर्ड कॉर्नवालिसकॉर्नवालिस कोड एवं स्थायी बंदोबस्त (Permanent Settlement)
लॉर्ड वेलेजलीसहायक संधि (Subsidiary Alliance)
लॉर्ड हेस्टिंग्समराठा शक्ति का अंत, अंग्रेजी प्रभुत्व का विस्तार
लॉर्ड विलियम बेंटिंकसती प्रथा का उन्मूलन (1829), आधुनिक शिक्षा नीति
लॉर्ड डलहौजीव्यपगत सिद्धांत (Doctrine of Lapse), रेल, डाक एवं टेलीग्राफ का विकास
लॉर्ड कैनिंग1857 के विद्रोह के समय गवर्नर-जनरल, प्रथम वायसराय बने

ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी का भारत पर प्रभाव

सकारात्मक प्रभाव

  • आधुनिक प्रशासनिक व्यवस्था की शुरुआत।
  • रेलवे, डाक एवं टेलीग्राफ जैसी आधारभूत सुविधाओं का विकास।
  • आधुनिक न्यायिक प्रणाली की स्थापना।
  • अंग्रेजी शिक्षा का प्रसार।
  • आधुनिक संचार एवं परिवहन का विस्तार।

नकारात्मक प्रभाव

  • भारतीय उद्योगों का पतन और आर्थिक शोषण।
  • कृषि पर अत्यधिक कर भार।
  • भारतीय संसाधनों का ब्रिटेन की ओर निर्यात।
  • सामाजिक एवं आर्थिक असमानताओं में वृद्धि।
  • भारत को औपनिवेशिक अर्थव्यवस्था में परिवर्तित कर दिया गया।

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निष्कर्ष

ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी ने भारत में एक व्यापारिक संस्था के रूप में प्रवेश किया, लेकिन धीरे-धीरे सैन्य शक्ति, कूटनीति और प्रशासनिक नीतियों के माध्यम से राजनीतिक सत्ता स्थापित कर ली। प्लासी और बक्सर जैसे युद्धों ने कंपनी को आर्थिक और राजनीतिक रूप से अत्यंत शक्तिशाली बना दिया। अंततः 1857 के विद्रोह के बाद कंपनी शासन समाप्त हुआ और भारत सीधे ब्रिटिश क्राउन के अधीन आ गया। प्रतियोगी परीक्षाओं की दृष्टि से स्थापना वर्ष, प्रमुख व्यापारिक केंद्र, प्लासी एवं बक्सर के युद्ध, दीवानी अधिकार, प्रमुख गवर्नर-जनरल तथा भारत शासन अधिनियम 1858 अत्यंत महत्वपूर्ण विषय हैं।

FAQ

Q1. ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी की स्थापना कब और किसने की थी?

ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी की स्थापना 31 दिसंबर 1600 को महारानी एलिज़ाबेथ प्रथम द्वारा दिए गए रॉयल चार्टर के माध्यम से की गई थी।

Q2. भारत में ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी का पहला व्यापारिक केंद्र कहाँ था?

भारत में कंपनी का पहला व्यापारिक केंद्र सूरत (1613) में स्थापित किया गया था।

Q3. प्लासी का युद्ध क्यों महत्वपूर्ण माना जाता है?

1757 का प्लासी युद्ध भारत में ब्रिटिश राजनीतिक प्रभुत्व की शुरुआत माना जाता है, क्योंकि इसके बाद ईस्ट इंडिया कंपनी ने बंगाल पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित कर लिया।

Q4. बक्सर के युद्ध का क्या महत्व था?

1764 के बक्सर युद्ध में विजय के बाद कंपनी को 1765 में बंगाल, बिहार और उड़ीसा की दीवानी प्राप्त हुई, जिससे उसे राजस्व वसूली का अधिकार मिला।

Q5. ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी का शासन कब समाप्त हुआ?

1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम के बाद भारत शासन अधिनियम, 1858 लागू हुआ और ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी का शासन समाप्त कर भारत का प्रशासन सीधे ब्रिटिश क्राउन के अधीन कर दिया गया।

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