Ramsar Sites of India | भारत के रामसर स्थल

भारत के रामसर स्थल भारत जैव विविधता और आर्द्रभूमियों (Wetlands) की दृष्टि से विश्व के समृद्ध देशों में से एक है। आर्द्रभूमियाँ न केवल जल संरक्षण और जैव विविधता के लिए महत्वपूर्ण हैं, बल्कि बाढ़ नियंत्रण, भूजल पुनर्भरण, मत्स्य पालन और लाखों लोगों की आजीविका का भी प्रमुख आधार हैं। इन्हीं आर्द्रभूमियों के संरक्षण के…

भारत के रामसर स्थल

भारत जैव विविधता और आर्द्रभूमियों (Wetlands) की दृष्टि से विश्व के समृद्ध देशों में से एक है। आर्द्रभूमियाँ न केवल जल संरक्षण और जैव विविधता के लिए महत्वपूर्ण हैं, बल्कि बाढ़ नियंत्रण, भूजल पुनर्भरण, मत्स्य पालन और लाखों लोगों की आजीविका का भी प्रमुख आधार हैं। इन्हीं आर्द्रभूमियों के संरक्षण के लिए रामसर कन्वेंशन (Ramsar Convention) के अंतर्गत अंतरराष्ट्रीय महत्व की आर्द्रभूमियों को रामसर स्थल (Ramsar Sites) का दर्जा दिया जाता है।

प्रतियोगी परीक्षाओं जैसे UPSC, State PCS, SSC, Railway, Banking, Forest Services तथा अन्य सरकारी परीक्षाओं में रामसर स्थलों से संबंधित प्रश्न नियमित रूप से पूछे जाते हैं। इस लेख में रामसर कन्वेंशन, भारत के प्रमुख रामसर स्थल, महत्वपूर्ण तथ्य तथा परीक्षा उपयोगी MCQs दिए गए हैं।

रामसर स्थल क्या हैं?

रामसर स्थल वे आर्द्रभूमियाँ (Wetlands) हैं जिन्हें उनके पारिस्थितिक, जैविक, वनस्पति, प्राणी एवं जलवैज्ञानिक महत्व के कारण अंतरराष्ट्रीय स्तर पर संरक्षण हेतु मान्यता दी जाती है।

इन स्थलों का चयन रामसर कन्वेंशन के मानकों के आधार पर किया जाता है।

रामसर कन्वेंशन (Ramsar Convention)

  • स्थापना वर्ष: 1971
  • स्थान: रामसर, ईरान
  • उद्देश्य: विश्व की महत्वपूर्ण आर्द्रभूमियों का संरक्षण एवं उनका सतत उपयोग (Wise Use)
  • भारत इस कन्वेंशन का सदस्य 1982 में बना।

आर्द्रभूमि (Wetland) क्या है?

आर्द्रभूमि वह क्षेत्र होता है जहाँ वर्षभर या वर्ष के अधिकांश समय जल मौजूद रहता है। इनमें झीलें, दलदली क्षेत्र, मैंग्रोव वन, नदी तट, बाढ़ क्षेत्र, जलाशय एवं खारे पानी के लैगून शामिल हैं।

भारत के प्रमुख रामसर स्थल

1. चिल्का झील (ओडिशा)

  • भारत की सबसे बड़ी खारे पानी की लैगून।
  • प्रवासी पक्षियों एवं इरावदी डॉल्फिन के लिए प्रसिद्ध।

2. केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान (राजस्थान)

  • भरतपुर में स्थित।
  • प्रवासी पक्षियों का प्रमुख आवास।
  • यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल।

3. लोकटक झील (मणिपुर)

  • उत्तर-पूर्व भारत की सबसे बड़ी मीठे पानी की झील।
  • प्रसिद्ध तैरते द्वीप फुमदी (Phumdi) पाए जाते हैं।
  • संगाई हिरण का प्राकृतिक आवास।

4. वुलर झील (जम्मू एवं कश्मीर)

  • भारत की सबसे बड़ी मीठे पानी की झीलों में से एक।
  • झेलम नदी पर स्थित।

5. सुंदरबन आर्द्रभूमि (पश्चिम बंगाल)

  • विश्व का सबसे बड़ा मैंग्रोव वन।
  • रॉयल बंगाल टाइगर का प्रमुख आवास।

6. हरिके आर्द्रभूमि (पंजाब)

  • सतलुज और ब्यास नदियों के संगम पर स्थित।
  • प्रवासी पक्षियों के लिए महत्वपूर्ण।

7. नलसरोवर पक्षी अभयारण्य (गुजरात)

  • हजारों प्रवासी पक्षियों का शीतकालीन निवास।
  • पक्षी प्रेमियों के लिए प्रसिद्ध।

8. दीपोर बील (असम)

  • गुवाहाटी के निकट स्थित महत्वपूर्ण आर्द्रभूमि।
  • हाथियों एवं प्रवासी पक्षियों के संरक्षण के लिए प्रसिद्ध।

रामसर स्थलों का महत्व

  • जैव विविधता का संरक्षण
  • जल संरक्षण एवं भूजल पुनर्भरण
  • बाढ़ नियंत्रण
  • प्रवासी पक्षियों का संरक्षण
  • मत्स्य संसाधनों की सुरक्षा
  • जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को कम करने में सहायता

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परीक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण तथ्य

  • रामसर कन्वेंशन: 1971
  • स्थान: रामसर (ईरान)
  • भारत सदस्य बना: 1982
  • चिल्का झील: सबसे बड़ी खारे पानी की लैगून
  • लोकटक झील: फुमदी के लिए प्रसिद्ध
  • केवलादेव: प्रवासी पक्षियों का प्रमुख आवास
  • सुंदरबन: विश्व का सबसे बड़ा मैंग्रोव क्षेत्र

निष्कर्ष

भारत के रामसर स्थल देश की प्राकृतिक धरोहर और जैव विविधता संरक्षण का महत्वपूर्ण आधार हैं। इन आर्द्रभूमियों का संरक्षण पर्यावरणीय संतुलन, जल सुरक्षा और वन्यजीव संरक्षण के लिए अत्यंत आवश्यक है। प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले अभ्यर्थियों को प्रमुख रामसर स्थल, उनके राज्य, विशेषताएँ तथा रामसर कन्वेंशन से जुड़े तथ्यों का नियमित अध्ययन अवश्य करना चाहिए।

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