Rainfall in India | भारत में वर्षा

भारत में वर्षा भारत एक कृषि प्रधान देश है, जहाँ अधिकांश कृषि मानसूनी वर्षा पर निर्भर करती है। भारत में होने वाली वर्षा का प्रमुख स्रोत दक्षिण-पश्चिम मानसून (South-West Monsoon) है, जो देश की कुल वार्षिक वर्षा का लगभग 70–75% भाग प्रदान करता है। भारत में वर्षा का वितरण समान नहीं है। कुछ क्षेत्रों में…

भारत में वर्षा

भारत एक कृषि प्रधान देश है, जहाँ अधिकांश कृषि मानसूनी वर्षा पर निर्भर करती है। भारत में होने वाली वर्षा का प्रमुख स्रोत दक्षिण-पश्चिम मानसून (South-West Monsoon) है, जो देश की कुल वार्षिक वर्षा का लगभग 70–75% भाग प्रदान करता है। भारत में वर्षा का वितरण समान नहीं है। कुछ क्षेत्रों में अत्यधिक वर्षा होती है, जबकि कुछ क्षेत्रों में बहुत कम वर्षा होती है।

प्रतियोगी परीक्षाओं जैसे UPSC, State PCS, SSC, Railway, Banking, CDS, NDA, CAPF तथा अन्य सरकारी परीक्षाओं में भारत में वर्षा, मानसून, वर्षा वितरण, वर्षा के प्रकार, वर्षा को प्रभावित करने वाले कारक तथा अधिक एवं कम वर्षा वाले क्षेत्रों से संबंधित प्रश्न नियमित रूप से पूछे जाते हैं। इस लेख में इन सभी विषयों का विस्तृत अध्ययन प्रस्तुत किया गया है।

भारत में वर्षा के प्रमुख स्रोत

भारत में वर्षा मुख्यतः निम्नलिखित स्रोतों से होती है—

दक्षिण-पश्चिम मानसून

  • भारत की अधिकांश वर्षा का प्रमुख स्रोत।
  • सामान्यतः जून के प्रथम सप्ताह में केरल तट पर प्रवेश करता है।
  • जून से सितंबर तक सक्रिय रहता है।
  • दो शाखाओं में विभाजित होता है—
    • अरब सागर शाखा
    • बंगाल की खाड़ी शाखा

उत्तर-पूर्व मानसून

  • अक्टूबर से दिसंबर के बीच सक्रिय।
  • तमिलनाडु, पुडुचेरी और दक्षिणी आंध्र प्रदेश में प्रमुख वर्षा का स्रोत।

पश्चिमी विक्षोभ

  • शीतकाल में उत्तर-पश्चिम भारत में हल्की वर्षा कराता है।
  • गेहूँ, चना और सरसों जैसी रबी फसलों के लिए लाभदायक।

संवहनात्मक वर्षा (Convectional Rainfall)

  • ग्रीष्म ऋतु में स्थानीय तापीय प्रभाव के कारण होती है।
  • पूर्वोत्तर भारत और दक्षिण भारत के कुछ भागों में सामान्य।

भारत में वर्षा के प्रकार

पर्वतीय (Orographic) वर्षा

जब आर्द्र हवाएँ पर्वतों से टकराकर ऊपर उठती हैं और ठंडी होकर वर्षा करती हैं, तो इसे पर्वतीय वर्षा कहते हैं।

उदाहरण: पश्चिमी घाट एवं मेघालय।

संवहनात्मक (Convectional) वर्षा

अधिक तापमान के कारण गर्म हवा ऊपर उठती है और संघनित होकर वर्षा करती है।

उदाहरण: कालबैसाखी (पश्चिम बंगाल एवं असम), आम्र वर्षा (केरल एवं कर्नाटक)।

चक्रवाती (Cyclonic) वर्षा

चक्रवातों एवं निम्न दाब प्रणालियों के कारण होने वाली वर्षा को चक्रवाती वर्षा कहते हैं।

उदाहरण: बंगाल की खाड़ी एवं अरब सागर से आने वाले चक्रवात।

भारत में वर्षा का वितरण

सर्वाधिक वर्षा वाले क्षेत्र

  • मौसिनराम (मेघालय)
  • चेरापूंजी (मेघालय)
  • पश्चिमी घाट
  • अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह

मध्यम वर्षा वाले क्षेत्र

  • गंगा का मैदान
  • ओडिशा
  • झारखंड
  • छत्तीसगढ़
  • पूर्वी भारत के अधिकांश क्षेत्र

न्यूनतम वर्षा वाले क्षेत्र

  • पश्चिमी राजस्थान (थार मरुस्थल)
  • लद्दाख का शीत मरुस्थल
  • कच्छ के कुछ क्षेत्र

वर्षा को प्रभावित करने वाले प्रमुख कारक

  • दक्षिण-पश्चिम मानसून
  • हिमालय पर्वतमाला
  • पश्चिमी घाट
  • समुद्र से दूरी
  • ऊँचाई
  • वायुदाब एवं पवनों की दिशा
  • एल-नीनो (El Niño) एवं ला-नीना (La Niña)

भारतीय कृषि में वर्षा का महत्व

  • खरीफ फसलों की बुवाई
  • सिंचाई पर निर्भरता में कमी
  • भूजल पुनर्भरण
  • जलाशयों एवं बाँधों का भराव
  • जलविद्युत उत्पादन
  • पेयजल उपलब्धता

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प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए महत्वपूर्ण तथ्य

  • भारत की अधिकांश वर्षा – दक्षिण-पश्चिम मानसून
  • मानसून का प्रथम प्रवेश – केरल
  • सर्वाधिक वर्षा – मौसिनराम (मेघालय)
  • न्यूनतम वर्षा – पश्चिमी राजस्थान
  • तमिलनाडु की मुख्य वर्षा – उत्तर-पूर्व मानसून
  • पश्चिमी विक्षोभ – उत्तर भारत की शीतकालीन वर्षा
  • भारत की लगभग 70–75% वार्षिक वर्षा मानसून से होती है।

निष्कर्ष

भारत में वर्षा देश की कृषि, जल संसाधनों, ऊर्जा उत्पादन और आर्थिक विकास का आधार है। दक्षिण-पश्चिम मानसून भारतीय वर्षा प्रणाली की रीढ़ है, जबकि उत्तर-पूर्व मानसून, पश्चिमी विक्षोभ और चक्रवाती प्रणालियाँ भी विभिन्न क्षेत्रों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। प्रतियोगी परीक्षाओं में वर्षा के प्रकार, मानसून की शाखाएँ, वर्षा वितरण, अधिक एवं कम वर्षा वाले क्षेत्र तथा वर्षा को प्रभावित करने वाले कारकों से संबंधित प्रश्न नियमित रूप से पूछे जाते हैं। इसलिए इन विषयों का नियमित अध्ययन और पुनरावृत्ति अत्यंत आवश्यक है।

FAQs

भारत में वर्षा का मुख्य स्रोत क्या है?
भारत में वर्षा का मुख्य स्रोत दक्षिण-पश्चिम मानसून है, जो देश की अधिकांश वार्षिक वर्षा प्रदान करता है।

भारत में सबसे अधिक वर्षा कहाँ होती है?
मेघालय के मौसिनराम में भारत और विश्व की सर्वाधिक औसत वार्षिक वर्षा दर्ज की जाती है।

तमिलनाडु में मुख्य वर्षा किस मानसून से होती है?
तमिलनाडु में मुख्य वर्षा उत्तर-पूर्व मानसून (अक्टूबर–दिसंबर) से होती है।

भारत में वर्षा के प्रमुख प्रकार कौन-कौन से हैं?
पर्वतीय (Orographic), संवहनात्मक (Convectional) और चक्रवाती (Cyclonic) वर्षा।

प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए भारत में वर्षा क्यों महत्वपूर्ण है?
UPSC, State PCS, SSC, Railway, Banking और अन्य परीक्षाओं में मानसून, वर्षा वितरण, वर्षा के प्रकार, अधिक एवं कम वर्षा वाले क्षेत्रों से संबंधित प्रश्न नियमित रूप से पूछे जाते हैं।

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