आधुनिक भारत के इतिहास में गवर्नर एवं गवर्नर जनरल का काल अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। ईस्ट इंडिया कंपनी के व्यापारिक संगठन से एक राजनीतिक शक्ति बनने तथा बाद में ब्रिटिश क्राउन के प्रत्यक्ष शासन की स्थापना तक अनेक गवर्नरों एवं गवर्नर जनरलों ने महत्वपूर्ण प्रशासनिक, सामाजिक, आर्थिक एवं सैन्य सुधार किए। प्रतियोगी परीक्षाओं में इनसे संबंधित प्रश्न नियमित रूप से पूछे जाते हैं।
गवर्नर और गवर्नर जनरल में अंतर
| गवर्नर | गवर्नर जनरल |
|---|---|
| किसी एक प्रेसीडेंसी (बंगाल, मद्रास, बंबई) का प्रमुख | पूरे ब्रिटिश भारत का सर्वोच्च प्रशासनिक अधिकारी |
| सीमित प्रशासनिक अधिकार | सभी प्रेसीडेंसी पर नियंत्रण |
| ईस्ट इंडिया कंपनी के अधीन | बाद में ब्रिटिश क्राउन के अधीन भी कार्य |
रेगुलेटिंग एक्ट, 1773
ब्रिटिश संसद ने 1773 के रेगुलेटिंग एक्ट के माध्यम से पहली बार भारत के प्रशासन में प्रत्यक्ष हस्तक्षेप किया।
मुख्य प्रावधान
- बंगाल के गवर्नर को गवर्नर जनरल ऑफ बंगाल बनाया गया।
- चार सदस्यीय कार्यकारी परिषद का गठन।
- कलकत्ता में सुप्रीम कोर्ट की स्थापना (1774)।
- मद्रास एवं बंबई प्रेसीडेंसी को बंगाल के अधीन किया गया।
प्रमुख गवर्नर एवं गवर्नर जनरल
1. वारेन हेस्टिंग्स (1772–1785)
भारत के प्रथम गवर्नर जनरल (बंगाल)।
मुख्य कार्य
- रेगुलेटिंग एक्ट, 1773 के बाद प्रथम गवर्नर जनरल बने।
- राजस्व व्यवस्था में सुधार।
- दीवानी एवं फौजदारी न्यायालयों का पुनर्गठन।
- एशियाटिक सोसाइटी (1784) की स्थापना में विलियम जोन्स को संरक्षण।
- प्रथम एवं द्वितीय आंग्ल-मराठा युद्ध के समय प्रशासन।
2. लॉर्ड कॉर्नवालिस (1786–1793)
मुख्य कार्य
- स्थायी बंदोबस्त (Permanent Settlement), 1793 लागू किया।
- कॉर्नवालिस सिविल सेवा सुधार।
- न्यायिक सुधार।
- पुलिस व्यवस्था का पुनर्गठन।
महत्वपूर्ण तथ्य: इन्हें भारतीय सिविल सेवा (ICS) का जनक कहा जाता है।
3. लॉर्ड वेलेजली (1798–1805)
मुख्य कार्य
- सहायक संधि प्रणाली (Subsidiary Alliance) लागू की।
- चौथा आंग्ल-मैसूर युद्ध।
- टीपू सुल्तान की मृत्यु (1799)।
- फोर्ट विलियम कॉलेज की स्थापना (1800)।
4. लॉर्ड हेस्टिंग्स (1813–1823)
मुख्य कार्य
- आंग्ल-नेपाल युद्ध (1814–16)
- सुगौली की संधि (1816)
- तृतीय आंग्ल-मराठा युद्ध
- मराठा शक्ति का अंत
5. लॉर्ड एमहर्स्ट (1823–1828)
मुख्य कार्य
- प्रथम आंग्ल-बर्मा युद्ध (1824–26)
- यांडाबू की संधि (1826)
6. लॉर्ड विलियम बैंटिक (1828–1835)
भारत के प्रथम गवर्नर जनरल ऑफ इंडिया (चार्टर एक्ट, 1833 के बाद)।
मुख्य कार्य
- सती प्रथा का उन्मूलन (1829)
- ठगी प्रथा का दमन
- अंग्रेजी शिक्षा नीति (1835)
- चार्टर एक्ट, 1833 लागू
महत्वपूर्ण तथ्य: इन्हें भारत में सामाजिक सुधारों का जनक माना जाता है।
7. लॉर्ड ऑकलैंड (1836–1842)
मुख्य कार्य
- प्रथम आंग्ल-अफगान युद्ध (1839)
8. लॉर्ड एलनबरो (1842–1844)
मुख्य कार्य
- सिंध का विलय (1843)
- चार्ल्स नेपियर द्वारा सिंध विजय
9. लॉर्ड हार्डिंग प्रथम (1844–1848)
मुख्य कार्य
- प्रथम आंग्ल-सिख युद्ध
- लाहौर की संधि (1846)
10. लॉर्ड डलहौजी (1848–1856)
आधुनिक भारत के सबसे महत्वपूर्ण गवर्नर जनरलों में से एक।
मुख्य कार्य
- Doctrine of Lapse (व्यपगत सिद्धांत)
- दूसरी आंग्ल-सिख युद्ध
- पंजाब का विलय
- डाक व्यवस्था का आधुनिकीकरण
- रेलवे की शुरुआत (1853)
- पहली टेलीग्राफ लाइन
- Public Works Department (PWD)
महत्वपूर्ण तथ्य: इन्हें भारत में रेलवे का जनक कहा जाता है।
11. लॉर्ड कैनिंग (1856–1862)
मुख्य कार्य
- 1857 का प्रथम स्वतंत्रता संग्राम
- भारत शासन अधिनियम, 1858
- ईस्ट इंडिया कंपनी का शासन समाप्त
- ब्रिटिश क्राउन का प्रत्यक्ष शासन प्रारंभ
महत्वपूर्ण तथ्य: लॉर्ड कैनिंग भारत के अंतिम गवर्नर जनरल एवं प्रथम वायसराय थे।
12. लॉर्ड एल्गिन प्रथम (1862–1863)
मुख्य कार्य
- 1857 के विद्रोह के बाद प्रशासन को स्थिर बनाने का प्रयास।
- उत्तर-पश्चिमी सीमा क्षेत्र की सुरक्षा पर विशेष ध्यान दिया।
- अपने कार्यकाल के दौरान ही उनका निधन हो गया।
13. सर जॉन लॉरेंस (1864–1869)
मुख्य कार्य
- “Masterly Inactivity Policy” (अहस्तक्षेप नीति) अपनाई।
- अफगानिस्तान के मामलों में प्रत्यक्ष हस्तक्षेप से बचने की नीति।
- सिंचाई एवं लोक निर्माण कार्यों को बढ़ावा दिया।
14. लॉर्ड मेयो (1869–1872)
मुख्य कार्य
- भारत की पहली जनगणना (1872) का कार्य प्रारम्भ कराया।
- वित्तीय विकेंद्रीकरण (Financial Decentralization) की शुरुआत।
- मेयो कॉलेज, अजमेर की स्थापना।
- अंडमान के पोर्ट ब्लेयर में एक कैदी द्वारा उनकी हत्या कर दी गई।
महत्वपूर्ण तथ्य: भारत में हत्या किए जाने वाले एकमात्र वायसराय।
15. लॉर्ड नॉर्थब्रुक (1872–1876)
मुख्य कार्य
- बिहार एवं बंगाल में अकाल राहत कार्य।
- बड़ौदा प्रकरण के दौरान प्रशासनिक कार्यवाही।
- कूका आंदोलन का दमन।
16. लॉर्ड लिटन (1876–1880)
मुख्य कार्य
- दिल्ली दरबार (1877) आयोजित कर महारानी विक्टोरिया को भारत की सम्राज्ञी घोषित किया।
- वर्नाक्युलर प्रेस एक्ट, 1878 लागू किया।
- आर्म्स एक्ट, 1878 लागू किया।
- द्वितीय आंग्ल-अफगान युद्ध।
- भीषण अकाल के बावजूद भव्य दिल्ली दरबार आयोजित किया।
17. लॉर्ड रिपन (1880–1884)
मुख्य कार्य
- वर्नाक्युलर प्रेस एक्ट समाप्त किया।
- स्थानीय स्वशासन (Local Self Government) की शुरुआत।
- फैक्ट्री एक्ट, 1881 लागू।
- हंटर शिक्षा आयोग (1882) का गठन।
- इल्बर्ट बिल (1883) प्रस्तुत किया।
महत्वपूर्ण तथ्य: इन्हें भारत में स्थानीय स्वशासन का जनक कहा जाता है।
18. लॉर्ड डफरिन (1884–1888)
मुख्य कार्य
- भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (INC) की स्थापना (1885) उनके कार्यकाल में हुई।
- तृतीय आंग्ल-बर्मा युद्ध।
- ऊपरी बर्मा का ब्रिटिश साम्राज्य में विलय।
19. लॉर्ड लैन्सडाउन (1888–1894)
मुख्य कार्य
- भारतीय परिषद अधिनियम, 1892 लागू।
- डूरंड रेखा (Durand Line) का निर्धारण (1893)।
20. लॉर्ड एल्गिन द्वितीय (1894–1899)
मुख्य कार्य
- भीषण अकाल एवं प्लेग महामारी।
- जन असंतोष में वृद्धि।
21. लॉर्ड कर्जन (1899–1905)
मुख्य कार्य
- बंगाल विभाजन (1905)।
- भारतीय विश्वविद्यालय अधिनियम, 1904।
- पुलिस आयोग।
- पुरातत्व विभाग को मजबूत किया।
- Ancient Monuments Preservation Act, 1904 लागू।
महत्वपूर्ण तथ्य: बंगाल विभाजन के विरोध में स्वदेशी आंदोलन प्रारम्भ हुआ।
22. लॉर्ड मिंटो द्वितीय (1905–1910)
मुख्य कार्य
- मॉर्ले-मिंटो सुधार (1909)।
- मुसलमानों के लिए पृथक निर्वाचन (Separate Electorates) की शुरुआत।
23. लॉर्ड हार्डिंग द्वितीय (1910–1916)
मुख्य कार्य
- 1911 में राजधानी कलकत्ता से दिल्ली स्थानांतरित।
- बंगाल विभाजन रद्द।
- दिल्ली दरबार (1911)।
24. लॉर्ड चेम्सफोर्ड (1916–1921)
मुख्य कार्य
- मॉन्टेग्यू-चेम्सफोर्ड सुधार (1919)।
- भारत सरकार अधिनियम, 1919।
- रॉलेट एक्ट।
- जलियांवाला बाग हत्याकांड (1919)।
- खिलाफत एवं असहयोग आंदोलन की शुरुआत।
25. लॉर्ड रीडिंग (1921–1926)
मुख्य कार्य
- चौरी-चौरा घटना।
- असहयोग आंदोलन की समाप्ति।
- स्वराज पार्टी की स्थापना।
26. लॉर्ड इरविन (1926–1931)
मुख्य कार्य
- साइमन कमीशन (1928)।
- पूर्ण स्वराज प्रस्ताव (1929)।
- दांडी मार्च (1930)।
- गांधी-इरविन समझौता (1931)।
- प्रथम गोलमेज सम्मेलन।
27. लॉर्ड विलिंगडन (1931–1936)
मुख्य कार्य
- द्वितीय एवं तृतीय गोलमेज सम्मेलन।
- सविनय अवज्ञा आंदोलन का दमन।
- कांग्रेस नेताओं की गिरफ्तारी।
28. लॉर्ड लिनलिथगो (1936–1943)
मुख्य कार्य
- भारत सरकार अधिनियम, 1935 लागू।
- द्वितीय विश्व युद्ध।
- अगस्त प्रस्ताव (1940)।
- क्रिप्स मिशन (1942)।
- भारत छोड़ो आंदोलन (1942)।
29. लॉर्ड वेवल (1943–1947)
मुख्य कार्य
- वेवल योजना।
- शिमला सम्मेलन (1945)।
- कैबिनेट मिशन (1946)।
30. लॉर्ड माउंटबेटन (1947–1948)
मुख्य कार्य
- 3 जून योजना (Mountbatten Plan)।
- भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम, 1947।
- भारत एवं पाकिस्तान का विभाजन।
- 15 अगस्त 1947 को भारत स्वतंत्र हुआ।
महत्वपूर्ण तथ्य: स्वतंत्र भारत के प्रथम गवर्नर जनरल (1947–1948)।
31. सी. राजगोपालाचारी (1948–1950)
मुख्य कार्य
- भारत के प्रथम एवं अंतिम भारतीय गवर्नर जनरल।
- 26 जनवरी 1950 तक इस पद पर रहे।
- संविधान लागू होने के बाद गवर्नर जनरल का पद समाप्त हो गया और राष्ट्रपति राष्ट्राध्यक्ष बने।
सबसे महत्वपूर्ण गवर्नर एवं गवर्नर जनरल
| गवर्नर/वायसराय | प्रमुख कार्य |
|---|---|
| वारेन हेस्टिंग्स | प्रथम गवर्नर जनरल (बंगाल) |
| कॉर्नवालिस | स्थायी बंदोबस्त |
| वेलेजली | सहायक संधि |
| विलियम बैंटिक | सती प्रथा समाप्त, प्रथम गवर्नर जनरल ऑफ इंडिया |
| डलहौजी | रेलवे, टेलीग्राफ, व्यपगत सिद्धांत |
| कैनिंग | 1857 का विद्रोह, प्रथम वायसराय |
| मेयो | वित्तीय विकेंद्रीकरण, मेयो कॉलेज |
| लिटन | वर्नाक्युलर प्रेस एक्ट |
| रिपन | स्थानीय स्वशासन, प्रेस की स्वतंत्रता |
| कर्जन | बंगाल विभाजन |
| मिंटो द्वितीय | पृथक निर्वाचन |
| हार्डिंग द्वितीय | राजधानी दिल्ली |
| चेम्सफोर्ड | रॉलेट एक्ट, जलियांवाला बाग |
| इरविन | गांधी-इरविन समझौता |
| लिनलिथगो | भारत छोड़ो आंदोलन |
| माउंटबेटन | भारत की स्वतंत्रता एवं विभाजन |
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- Battle of Buxar (बक्सर का युद्ध, 1764)
- Battle of Plassey (प्लासी का युद्ध, 1757)
- British East India Company (ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी)
- Arrival of European Companies in India (भारत में यूरोपीय कंपनियों का आगमन)
आधुनिक भारत के इतिहास में गवर्नर एवं गवर्नर जनरल ने ब्रिटिश प्रशासन, न्याय व्यवस्था, शिक्षा, सामाजिक सुधार, भूमि व्यवस्था, परिवहन, संचार तथा भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन की दिशा को गहराई से प्रभावित किया। वारेन हेस्टिंग्स से लेकर सी. राजगोपालाचारी तक प्रत्येक गवर्नर जनरल के कार्यकाल में ऐसी महत्वपूर्ण घटनाएँ हुईं, जिन्होंने भारत के राजनीतिक एवं प्रशासनिक इतिहास को नया स्वरूप दिया।
प्रतियोगी परीक्षाओं की दृष्टि से किस गवर्नर जनरल ने कौन-सा अधिनियम लागू किया, कौन-सी नीति शुरू की, किस सामाजिक सुधार को लागू किया तथा किसके कार्यकाल में कौन-सी ऐतिहासिक घटना घटी, यह अत्यंत महत्वपूर्ण विषय है। इसलिए UPSC, State PCS, RPSC, SSC, Railway, Banking, NDA, CDS, CAPF एवं अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले अभ्यर्थियों को सभी गवर्नरों एवं गवर्नर जनरलों के कार्यों का क्रमबद्ध अध्ययन एवं नियमित पुनरावृत्ति अवश्य करनी चाहिए।
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