Eastern Ghats (पूर्वी घाट): स्थिति, विस्तार, प्रमुख पर्वत, नदियाँ, वन्यजीव एवं महत्वपूर्ण तथ्य

पूर्वी घाट (Eastern Ghats) भारत के प्रायद्वीपीय पठार के पूर्वी भाग में स्थित प्राचीन व अवशिष्ट (Residual) पर्वतमाला है। यह पर्वतमाला उत्तर में ओडिशा से शुरू होकर आंध्र प्रदेश, तेलंगाना के कुछ भागों तथा तमिलनाडु तक फैली हुई है। पश्चिमी घाट की तुलना में पूर्वी घाट अधिक खंडित (Discontinuous) है क्योंकि महानदी, गोदावरी, कृष्णा और…

पूर्वी घाट (Eastern Ghats) भारत के प्रायद्वीपीय पठार के पूर्वी भाग में स्थित प्राचीन व अवशिष्ट (Residual) पर्वतमाला है। यह पर्वतमाला उत्तर में ओडिशा से शुरू होकर आंध्र प्रदेश, तेलंगाना के कुछ भागों तथा तमिलनाडु तक फैली हुई है। पश्चिमी घाट की तुलना में पूर्वी घाट अधिक खंडित (Discontinuous) है क्योंकि महानदी, गोदावरी, कृष्णा और कावेरी जैसी नदियाँ इसे कई स्थानों पर काटते हुए बंगाल की खाड़ी में गिरती हैं।

पूर्वी घाट जैव विविधता, खनिज संसाधनों, वन संपदा और जलवायु संतुलन की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। भारत के भूगोल तथा विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में इससे संबंधित प्रश्न नियमित रूप से पूछे जाते हैं।

पूर्वी घाट का परिचय

विवरणजानकारी
पर्वतमालापूर्वी घाट (Eastern Ghats)
स्थितिभारत के पूर्वी तटीय भाग में
विस्तारओडिशा से तमिलनाडु तक
अनुमानित लंबाईलगभग 1,750 किमी
सर्वोच्च शिखरजिंदाघड़ा (आंध्र प्रदेश)
सर्वोच्च ऊँचाईलगभग 1,690 मीटर
प्रमुख राज्यओडिशा, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, तमिलनाडु

पूर्वी घाट की प्रमुख विशेषताएँ

  • यह भारत की प्राचीन अवशिष्ट पर्वतमाला है।
  • पूर्वी घाट पश्चिमी घाट की तुलना में खंडित (Discontinuous) है।
  • अनेक बड़ी नदियाँ इस पर्वतमाला को काटते हुए बंगाल की खाड़ी में मिलती हैं।
  • यहाँ ग्रेनाइट, नाइस, चार्नोकाइट तथा रूपांतरित चट्टानों की प्रधानता पाई जाती है।
  • पूर्वी घाट जैव विविधता और वन संपदा से समृद्ध है।

पूर्वी घाट का भौगोलिक विस्तार

पूर्वी घाट का विस्तार उत्तर में ओडिशा से प्रारंभ होकर आंध्र प्रदेश के अधिकांश भागों से गुजरते हुए तमिलनाडु तक होता है। कुछ पर्वतीय भाग तेलंगाना से भी जुड़े हुए हैं।

यह पर्वतमाला पूर्वी तटीय मैदान के समानांतर स्थित है, किन्तु पश्चिमी घाट की भाँति निरंतर नहीं है। प्रमुख नदियों द्वारा इसे कई भागों में विभाजित कर दिया गया है।

पूर्वी घाट की प्रमुख पर्वत श्रेणियाँ

पूर्वी घाट के अंतर्गत अनेक स्थानीय पर्वत श्रेणियाँ सम्मिलित हैं—

  • नल्लमाला पर्वतमाला
  • शेषाचलम पर्वतमाला
  • पालकोंडा पर्वतमाला
  • वेलिकोंडा पर्वतमाला
  • जावड़ी पहाड़ियाँ
  • शेवरॉय पहाड़ियाँ
  • कलरायन पहाड़ियाँ

इन पर्वत श्रेणियों का भूगोल एवं पारिस्थितिकी की दृष्टि से विशेष महत्व है।

पूर्वी घाट की प्रमुख चोटियाँ

  • जिंदाघड़ा – पूर्वी घाट की सर्वोच्च चोटी (आंध्र प्रदेश)
  • अरमा कोंडा – प्रमुख उच्च शिखर
  • महेंद्रगिरि – ओडिशा का प्रसिद्ध पर्वत
  • येरकौड क्षेत्र की चोटियाँ – तमिलनाडु में स्थित

पूर्वी घाट को काटने वाली प्रमुख नदियाँ

पूर्वी घाट की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता यह है कि कई बड़ी नदियाँ इसे काटते हुए बंगाल की खाड़ी में गिरती हैं।

प्रमुख नदियाँ—

  • महानदी
  • गोदावरी
  • कृष्णा
  • पेन्नार
  • कावेरी

इन्हीं नदियों के कारण पूर्वी घाट कई भागों में विभाजित दिखाई देता है।

पूर्वी घाट की वनस्पति एवं वन्यजीव

पूर्वी घाट में मुख्यतः उष्णकटिबंधीय पर्णपाती वन पाए जाते हैं। अधिक वर्षा वाले क्षेत्रों में सदाबहार वन भी विकसित हुए हैं।

यहाँ पाए जाने वाले प्रमुख वृक्ष—

  • सागौन
  • साल (कुछ क्षेत्रों में)
  • बाँस
  • चंदन
  • महुआ
  • तेंदू

प्रमुख वन्यजीव

  • एशियाई हाथी
  • बाघ
  • तेंदुआ
  • गौर
  • सांभर
  • चीतल
  • जंगली कुत्ता
  • अनेक दुर्लभ पक्षी एवं सरीसृप

पूर्वी घाट के प्रमुख संरक्षित क्षेत्र

पूर्वी घाट क्षेत्र में अनेक राष्ट्रीय उद्यान और वन्यजीव अभयारण्य स्थित हैं, जिनका उद्देश्य जैव विविधता का संरक्षण है।

कुछ प्रमुख संरक्षित क्षेत्र—

  • सिमलीपाल क्षेत्र (ओडिशा)
  • पापीकोंडा राष्ट्रीय उद्यान
  • श्री वेंकटेश्वर राष्ट्रीय उद्यान
  • सत्यमंगलम टाइगर रिजर्व (तमिलनाडु का भाग)

इन क्षेत्रों में अनेक दुर्लभ वनस्पतियाँ एवं वन्यजीव पाए जाते हैं।

पूर्वी घाट का आर्थिक महत्व

पूर्वी घाट भारत की अर्थव्यवस्था में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

  • खनिज संसाधनों की उपलब्धता
  • वन उत्पादों का उत्पादन
  • जलग्रहण क्षेत्र के रूप में महत्व
  • कृषि के लिए जल उपलब्धता
  • पर्यटन एवं धार्मिक स्थल
  • जैव विविधता संरक्षण

पूर्वी घाट और पश्चिमी घाट में अंतर

आधारपूर्वी घाटपश्चिमी घाट
प्रकृतिखंडित पर्वतमालासतत पर्वतमाला
स्थितिपूर्वी तट के समानांतरपश्चिमी तट के समानांतर
वर्षाअपेक्षाकृत कमअधिक
नदियाँअनेक नदियाँ काटती हैंअधिकांश नदियों का उद्गम
सर्वोच्च शिखरजिंदाघड़ाअनैमुडी

परीक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण तथ्य

  • पूर्वी घाट एक प्राचीन अवशिष्ट पर्वतमाला है।
  • इसका विस्तार ओडिशा से तमिलनाडु तक है।
  • इसकी सर्वोच्च चोटी जिंदाघड़ा है।
  • महानदी, गोदावरी, कृष्णा और कावेरी इसे काटती हैं।
  • यह पश्चिमी घाट की तुलना में अधिक खंडित है।
  • यहाँ उष्णकटिबंधीय पर्णपाती वन प्रमुख रूप से पाए जाते हैं।

यह भी पढ़ें

FAQ

1. पूर्वी घाट कहाँ स्थित हैं?

पूर्वी घाट भारत के पूर्वी तटीय भाग में ओडिशा से तमिलनाडु तक फैले हुए हैं।

2. पूर्वी घाट की सर्वोच्च चोटी कौन-सी है?

पूर्वी घाट की सर्वोच्च चोटी जिंदाघड़ा (लगभग 1,690 मीटर) है।

3. पूर्वी घाट को कौन-कौन सी नदियाँ काटती हैं?

महानदी, गोदावरी, कृष्णा, पेन्नार और कावेरी जैसी प्रमुख नदियाँ पूर्वी घाट को काटते हुए बंगाल की खाड़ी में गिरती हैं।

4. पूर्वी घाट किस प्रकार की पर्वतमाला है?

पूर्वी घाट एक प्राचीन अवशिष्ट (Residual) एवं खंडित पर्वतमाला है।

5. पूर्वी घाट का सबसे बड़ा महत्व क्या है?

पूर्वी घाट जैव विविधता, वन संपदा, खनिज संसाधनों, जल संरक्षण तथा पर्यावरणीय संतुलन के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।

निष्कर्ष

पूर्वी घाट भारत के प्रायद्वीपीय भूगोल का महत्वपूर्ण अंग है। यद्यपि यह पश्चिमी घाट की तुलना में कम ऊँचा और अधिक खंडित है, फिर भी जैव विविधता, प्राकृतिक संसाधनों, जल संरक्षण तथा पर्यावरणीय संतुलन के लिए इसका विशेष महत्व है। प्रतियोगी परीक्षाओं की दृष्टि से पूर्वी घाट का भौगोलिक विस्तार, प्रमुख पर्वत श्रेणियाँ, नदियाँ, सर्वोच्च शिखर तथा वन्यजीव संबंधी तथ्य अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।

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