भारत के प्रमुख पठार (Plateaus of India)
पठार (Plateau) पृथ्वी की सतह का वह ऊँचा एवं अपेक्षाकृत समतल भाग होता है, जिसकी ऊँचाई आसपास के क्षेत्रों से अधिक होती है। भारत का अधिकांश दक्षिणी भाग प्रायद्वीपीय पठार के अंतर्गत आता है, जो देश का सबसे प्राचीन भू-भाग माना जाता है। यह पठार खनिज संसाधनों, कृषि, जलविद्युत, उद्योग तथा प्राकृतिक संपदा की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है।
भारत के प्रमुख पठारों से संबंधित प्रश्न UPSC, State PCS, SSC, Railway, CTET, REET तथा अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में नियमित रूप से पूछे जाते हैं।
पठार क्या है?
पठार एक ऐसी स्थलाकृति है जिसकी सतह समतल या हल्की ऊबड़-खाबड़ होती है, लेकिन यह आसपास के मैदानों से अधिक ऊँचाई पर स्थित होती है। नदियों, ज्वालामुखीय क्रियाओं तथा भूगर्भीय हलचलों के कारण पठारों का निर्माण होता है।
भारत के प्रमुख पठार
| पठार | प्रमुख राज्य |
|---|---|
| दक्कन का पठार | महाराष्ट्र, कर्नाटक, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु |
| मालवा का पठार | मध्य प्रदेश, राजस्थान |
| छोटा नागपुर पठार | झारखंड, ओडिशा, पश्चिम बंगाल, छत्तीसगढ़ |
| मेघालय पठार | मेघालय |
| बुंदेलखंड पठार | उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश |
| बघेलखंड पठार | मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश |
| तेलंगाना पठार | तेलंगाना |
| कर्नाटक पठार | कर्नाटक |
1. दक्कन का पठार (Deccan Plateau)
दक्कन का पठार भारत का सबसे बड़ा और महत्वपूर्ण पठार है। इसका विस्तार नर्मदा नदी के दक्षिण से लेकर भारत के दक्षिणी छोर तक है।
प्रमुख विशेषताएँ
- भारत का सबसे बड़ा पठार।
- ज्वालामुखीय लावा से निर्मित।
- यहाँ काली मिट्टी (रेगुर मिट्टी) का व्यापक विस्तार है।
- कपास की खेती के लिए प्रसिद्ध।
- पश्चिमी एवं पूर्वी घाट इसी पठार के किनारों पर स्थित हैं।
2. मालवा का पठार
मालवा का पठार मध्य भारत में स्थित है तथा मुख्यतः मध्य प्रदेश एवं दक्षिण-पूर्वी राजस्थान में फैला हुआ है।
प्रमुख विशेषताएँ
- ज्वालामुखीय लावा से निर्मित।
- काली मिट्टी का विस्तार।
- सोयाबीन एवं गेहूँ उत्पादन के लिए प्रसिद्ध।
- चम्बल, कालीसिंध एवं बेतवा जैसी नदियाँ यहाँ से प्रवाहित होती हैं।
3. छोटानागपुर पठार
छोटानागपुर पठार भारत का सबसे महत्वपूर्ण खनिज क्षेत्र माना जाता है। इसका अधिकांश भाग झारखंड में स्थित है।
प्रमुख विशेषताएँ
- भारत का “खनिज भंडार” कहलाता है।
- कोयला, लौह अयस्क, बॉक्साइट, अभ्रक एवं यूरेनियम के विशाल भंडार।
- जमशेदपुर, बोकारो, धनबाद एवं राँची जैसे औद्योगिक नगर इसी क्षेत्र में स्थित हैं।
- दामोदर घाटी औद्योगिक विकास का प्रमुख केंद्र है।
4. मेघालय पठार
मेघालय पठार पूर्वोत्तर भारत में स्थित है। यह मुख्य प्रायद्वीपीय पठार से राजमहल गैप द्वारा अलग हो गया है।
प्रमुख विशेषताएँ
- मुख्य भाग—गारो, खासी एवं जयंतिया पहाड़ियाँ।
- अत्यधिक वर्षा वाला क्षेत्र।
- चूना पत्थर एवं कोयले के भंडार।
- पर्यटन की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण।
5. बुंदेलखंड पठार
बुंदेलखंड पठार उत्तर प्रदेश एवं मध्य प्रदेश के बीच स्थित है।
प्रमुख विशेषताएँ
- ग्रेनाइट चट्टानों की प्रधानता।
- वर्षा की कमी के कारण जल संकट की समस्या।
- प्रमुख नदियाँ—बेतवा, केन एवं धसान।
6. बघेलखंड पठार
बघेलखंड पठार मध्य प्रदेश एवं उत्तर प्रदेश के दक्षिणी भाग में स्थित है।
प्रमुख विशेषताएँ
- विंध्य एवं कैमूर पर्वत श्रृंखलाओं के बीच स्थित।
- सोन नदी इस क्षेत्र की प्रमुख नदी है।
- कृषि एवं खनिज दोनों की दृष्टि से महत्वपूर्ण।
7. तेलंगाना पठार
तेलंगाना पठार दक्कन पठार का एक भाग है।
प्रमुख विशेषताएँ
- ग्रेनाइट चट्टानों की अधिकता।
- गोदावरी एवं कृष्णा नदी तंत्र का प्रभाव।
- कपास, ज्वार एवं दलहनों की खेती प्रमुख।
8. कर्नाटक पठार
कर्नाटक पठार दक्षिण भारत के प्रमुख पठारों में से एक है।
प्रमुख विशेषताएँ
- दक्कन पठार का दक्षिण-पश्चिमी भाग।
- कॉफी एवं मसालों की खेती के लिए प्रसिद्ध।
- लौह अयस्क एवं मैंगनीज के महत्वपूर्ण भंडार।
भारत के पठारों का महत्व
भारत के पठार देश की अर्थव्यवस्था एवं प्राकृतिक संसाधनों का आधार हैं।
- खनिज संसाधनों का प्रमुख स्रोत।
- जलविद्युत परियोजनाओं के लिए उपयुक्त।
- कपास, दालें एवं तिलहन की खेती।
- लौह एवं इस्पात उद्योगों का विकास।
- जैव विविधता एवं वन संपदा का संरक्षण।
- पर्यटन एवं प्राकृतिक सौंदर्य का केंद्र।
भारत के पठारों में पाए जाने वाले प्रमुख खनिज
| खनिज | प्रमुख पठार |
|---|---|
| कोयला | छोटानागपुर |
| लौह अयस्क | छोटानागपुर, कर्नाटक |
| बॉक्साइट | छोटानागपुर, दक्कन |
| अभ्रक | छोटानागपुर |
| मैंगनीज | कर्नाटक, महाराष्ट्र |
परीक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण तथ्य
- भारत का सबसे बड़ा पठार दक्कन का पठार है।
- छोटानागपुर पठार को भारत का खनिज भंडार कहा जाता है।
- मेघालय पठार मुख्य प्रायद्वीपीय पठार से राजमहल गैप द्वारा अलग है।
- दक्कन का पठार ज्वालामुखीय लावा से निर्मित है।
- मालवा पठार काली मिट्टी के लिए प्रसिद्ध है।
- कर्नाटक पठार लौह अयस्क के उत्पादन में महत्वपूर्ण है।
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FAQ
1. भारत का सबसे बड़ा पठार कौन-सा है?
दक्कन का पठार भारत का सबसे बड़ा पठार है।
2. भारत का खनिज भंडार किस पठार को कहा जाता है?
छोटानागपुर पठार को भारत का खनिज भंडार कहा जाता है।
3. मेघालय पठार किस गैप द्वारा प्रायद्वीपीय पठार से अलग हुआ है?
मेघालय पठार राजमहल गैप द्वारा अलग हुआ है।
4. दक्कन का पठार किस प्रकार का पठार है?
दक्कन का पठार ज्वालामुखीय लावा से निर्मित पठार है।
5. भारत के प्रमुख पठार कौन-कौन से हैं?
दक्कन, मालवा, छोटानागपुर, मेघालय, बुंदेलखंड, बघेलखंड, तेलंगाना तथा कर्नाटक भारत के प्रमुख पठार हैं।
निष्कर्ष
भारत के प्रमुख पठार देश की भौगोलिक संरचना, खनिज संपदा, कृषि एवं औद्योगिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। दक्कन, छोटानागपुर, मालवा, मेघालय, बुंदेलखंड तथा कर्नाटक जैसे पठार अपनी विशिष्ट भौगोलिक एवं आर्थिक विशेषताओं के कारण भारत के विकास में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं। प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले अभ्यर्थियों के लिए इन पठारों का स्थान, विशेषताएँ, खनिज एवं प्रमुख नदियाँ विशेष रूप से महत्वपूर्ण हैं।
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